कुछ इस तरह की
मिट्टी से बना है वो (खुदा),
याद करोगे तो
अहसास भी मुस्कुरा देगा!
कुछ इस तरह का सुकून है
उसकी महोब्ब्त में;
क़ि वो रुह को भी
नींद से जगा देगा!
गर तेरा जज़्बा
उसके जज़्बे से मिल जाये;
ओस की बूंद को भी
वो संमन्दर बना देगा!
भला क्यूं और कैसे जीते हो तुम....
उससे दूर रहके!
जो यादों की छुअन से ही तुमको....
खुदा बना देगा।
बहुत चला ली कश्ती तुमने
इस दुनिया के समन्दर में,
अब जरा डूब के भी देखो....
वो तैरना सिखा देगा।
रूह सिर्फ़ महोब्ब्त के
सांचे में ढ्लती है;
ज़रा महोब्ब्त निभा कर तो देखो...
वो तुमको ही महोब्ब्त बना देगा!!
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